फिल्में देख-देख कर सीखा अभिनय

शिवराज गूजर
बचपन में सपने तो बहुत लोग देखते हैं, पर उनको सच मुठ्ठी भर ही पाते हैं। ऐसे ही विरले लोगों में से एक हैं अभिनेत्री दीप्ती धोत्रे। दीप्ती ने जिद की और सारी कायनात लग गई उसके ख्वाब को हकीकत में बदलने में। हालांकि, यह सब इतनी आसानी से नहीं हो गया। इसके लिए उन्हें स्ट्रगल करना पड़ा, पर वो हारी नहीं । हर हार पर अपने हौसले को मजबूत किया और पा लिया वो जो उसने सोचा था। आज वो हिंदी और मराठी के राजस्थानी फिल्मों में अभिनय कर रही हैं। अपनी पहली ही राजस्थानी फिल्म धरम बहन में अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचने वाली अभिनेत्री दीप्ती धोत्रे की जल्द ही हिंदी फिल्म धारा 302 रिलीज होने वाली है। इसके साथ ही उनकी मुख्य भूमिका वाली राजस्थानी फिल्म मजो आ गयो भी बनकर तैयार है। अपने फिल्मी सफर और करिअर पर दीप्ती ने राजस्थानी सिनेमा डॉट कॉम से खुलकर की बात।

rajasthani movie actress dipti dhotre

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शुरुआत एंकरिंग से
एक्टिंग का शौक मुझे बचपन में ही लग गया था। जैसे ही मैं समझने लगी मैंने तय कर लिया कि मुझे एक्टिंग ही करनी है और कुछ नहीं। उस वक्त से ही मैंने इसकी तैयारी भी शुुरू कर दी। स्कूल खत्म हुआ तो मैंने न्यूज एंकरिंग शुरू कर दी। अब मेरी एक्टिंग के शौक में एक रोड़ा था वह यह कि मैं जहां रहती थी वहां कोई एक्टिंग इंस्टीट्यूट नहीं था। मैं अपना लक्ष्य नहीं छोड़ना चाहती थी, इसलिए मंैने एनिमेशन डिप्लोमा में प्रवेश ले लिया।

पहला और आखिरी प्ले कॉलेज में
इस दौरान मैने कॉलेज में होने वाले स्टेट लेवल ड्रामा कॉम्पीटिशन में भी भाग लिया। उसमें हमने गिरीश कर्नाड का नाटक किया। यह मेरा पहला और आखिरी प्ले था। इसके बाद मैंने स्टेज पर प्ले नहीं किया।

फिल्में देखने से समझ में आने लगे कैरेक्टर
इसके बाद मैंनें फिल्में देख-देख कर ही मैंने एक्टिंग की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। उस दौरान का होम वर्क आज मेरे बहुत काम आ रहा है। जैसे ही मैं अपने कैरेक्टर के बारे में सुनती हूं तो एक खाका तो उसका मेरे दिमाग में खिंच ही जाता है जो मेरे डाइरेक्टर द्वारा दिए निर्देशों के अनुसार उस कैरेक्टर में ढलने में मेरी मदद करता है।

दूरदर्शन में मिला एंकरिंग का मौका
एनिमेशन करने के बाद मैने एडिटिंग सीखी और एक एजेंसी में काम करना शुरू किया। इस दौरान खाली समय में स्टेज एंकरिंग भी जारी रखी। इस दौरान एक इवेंट आॅर्गेनाइजर से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे दूरदर्शन नेशनल चैनल में भेजा। वहां इंटरव्यू में सलेक्ट हो गई। मुझे एक स्ट्रीट शो की एंकरिंग का मौका दिया गया। इसके बाद मैं एडिट वाला जॉब छोड़कर मुंबई शिफ्ट हो गयी। इस दौरान कुछ इन हाउस स्किट्स भी मुझे करने को मिले।

फिर लौट आई एडिटिंग की दुनिया में
कुछ दिन दूरदर्शन में काम करने के बाद मुझे लगा कि इन पैसों से पूरा नहीं पड़ रहा है। परेशानी बढ़ने पर मैंने दूरदर्शन वाला जॉब छोड़ दिया और एक बार फिर से एडिटिंग वाला जॉब स्टार्ट कर दिया। वहां की और मुंबई की एडिटिंग में बहुत चैंज था ऐसे में मैंने सीखने के लिए एक सीनियर के पास ट्रेनी के रूप में ज्वाइन कर लिया। इस दौरान बॉडीगार्ड फिल्म में एडिटर प्रणव धीवर के पास असिस्टेंट के रूप में काम किया।

…और डिसाइड किया कि अब सिर्फ एक्टिंग करूंगी
इस दौरान मुझे लगा कि मैं अपने एक्टिंग वाले लक्ष्य से भटक रही हूं, तब मैंने डिसाइड किया कि अब सिर्फ एक्टिंग करनी है। इसके लिए चाहे जितना स्ट्रगल करना पड़े पर यह लाइन नहीं नहीं छोड़ूंगी।

पहली फिल्म राजस्थानी
मैं हिंदी फिल्मों में काम के लिए स्ट्रगल कर रही थी। मेरी मेहनत कहो या किस्मत, मुझे पहला आॅफर राजस्थानी फिल्म का मिला। भाषा मेरे लिए कोई परेशानी नहीं थी, इसलिए मैंने हामी भर दी। इस तरह मुझे पहली फिल्म धरम बहन मिली। फिल्म रिलीज हुई और दर्शकों का अच्छा रिस्पांस भी मिला।

मराठी फिल्म का सपना हुआ पूरा
मुंबई आने के बाद मेरी इच्छा मराठी फिल्म करने की थी। दो महीने में ही मेरा यह सपना भी पूरा हुआ। मुझे मराठी फिल्म मिल गई वो भी हीरोइन के रूप में। यह फिल्म रिलीज हो चुकी है। इसमें भी मेरा रोल बहुत चैलेंजिंग था। कई डिफरेंट शेड्स थे। इस रोल से मेरे  एक्टिंग स्किल्स में काफी सुधार हुआ।

हर फिल्म देखने के साथ बदलता है ड्रीम रोल
मेरा ड्रीम रोल एक नहीं कई हैं। जब भी कोई नई या पुरानी फिल्म देखती हूं तो उसमें हीरोइन का रोल अच्छा होता है तो वही मेरा ड्रीम रोल बन जाता है। मेरी इच्छा हर तरह का रोल करने की है। वैसे में जब स्कूल में थी तो मैंने प्रेमग्रंथ फिल्म देखी थी। उस वक्त यह रोल मेरा ड्रीम बन गया था। मैं सोचती थी काश! ऐसा दमदार रोल मुझे करने को मिल जाये। मेरा यह ड्रीम अब जाकर पूरा हुआ। मराठी फिल्म में मेरा वैसा ही रोल है। एक चुलबुली लड़की से लेकर एक प्रेग्नेंट औरत तक का सफर। का रोल प्ले किया है।

अपकमिंग प्रोजेक्ट
नेशनल अवार्ड विनर शिवाजी लोटन-पाटिल की मराठी फिल्म जीआर, प्रोड्यूसर भवानीजी योगी और डाइरेक्टर जितेंद्र सिंह नरूका की हिन्दी फिल्म धारा 302 मेरी आने वाली फिल्में हैं। धारा 302 कोटा के रियल गेंगस्टर के ऊपर बनी है। इसमें मैं हीरो की प्रेमिका के रोल में हूं। इसके अलावा निर्माता एनके मित्तल और निर्देशक लखविंदर सिंह की राजस्थानी फिल्म मजो आ गयो भी बनकर तैयार है। यह एक कॉमेडी फिल्म है।

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