यमराज को सामने देख उग्रसेन तंवर की बंधी घिग्गी

bhagwan mahaveer ki divya vani

कोठारी गढ़ में उषा जैन के निर्देशन में चल रही हिंदी फीचर फ़िल्म ‘प्रभु महावीर की दिव्यवाणी की शूटिंग
जयपुर। किसान से पैसे नहीं देने पर छीन कर लाए जेवरों की चमक और नगर सेठ बने उग्रसेन तंवर की आंखें की चमक मिक्स सी हो रही थी। तभी उसकी नजर सामने खड़े व्यक्ति पर पड़ती है। एकदम तगड़ा। बड़ी—बड़ी मूंछें। एक दम काली स्याह ड्रेस और कांधे पर गदा। यह यमराज हैं, समझते ही सेठ की तो घिग्गी बंध गई। यमराज ने जैसे ही हाथ बढ़ाकर नगर सेठ को अपने साथ ले जाने के लिए पकड़ा, कट की आवाज आई और इसी के साथ यह सीन ओके हो गया। यह दृश्य था भांकरोटा स्थित कोठारीगढ़ में चल रही हिंदी फीचर फ़िल्म ‘प्रभु महावीर की दिव्यवाणी (divine words of mahaveera} की शूटिंग का।

हम जब कोठारी गढ़ पहुंचे तब निर्देशक उषा जैन सीन की तैयारी में जुटी थीं। ट्रॉली लगाई जा चुकी थी। बस थोड़ा सेट का काम चल रहा था। निर्माता श्रवण जैन ने हमें रिसीव किया और फिल्माये जा रहे सीन के बारे में बताया। तभी सेट रेडी हो गया और उषा जैन ने जोर से साइलेंट बोला तो सब चुप हो गए। हम भी मॉनीटर के सामने जाकर बैठ गए। एक्शन के साथ ही नगर सेठ बने उग्रसैन तंवर और उनके सेवक बने श्याम पंडित ने संवाद बोलना शुरू किया, इसके साथ ही ट्रॉली भी स्टार्ट हुई। बीच में ही निर्देशक ने कट बोल दिया। शायद वे जैसा चाह रही थीं वैसा हो नहीं रहा था। एक बार फिर से वही सब दोहराया गया। इस तरह दो—तीन टेक के बाद सीन ओके हो गया।

अगले सीन की तैयारी के दौरान निर्माता श्रवण जैन ने हमें कोठारी गढ़ दिखाया। करीब सवा दो सौ बीघा में बना यह गढ़ मनमोहक है। एक दम राजसी। पग—पग पर आश्चर्यचकित कर देने वाली चीजें। राजसी उद्यान और उसमें निर्भय होकर विचरण करते मोर। पुराना वैभव अपने दौर का तो मॉडर्न युग की अपनी झलक। दोनों अपने—अपने सौंदर्य से भरपूर। अपने—अपने दमखम के साथ मौजूद। अंधेरा सा होने लगा था सो हमने निर्माता श्रवण जैन व निर्देशक उषा जैन को फिल्म की निर्बाध शूटिंग और कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दी और उनसे विदा ली।

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