तीन दिन जयपुर में लगेगा राजस्थानी फिल्मों का मेला

तीन दिन जयपुर में लगेगा राजस्थानी फिल्मों का मेला

तीन दिन जयपुर में लगेगा राजस्थानी फिल्मों का मेला

तीन दिन जयपुर में लगेगा राजस्थानी फिल्मों का मेला
राजस्थानी फिल्म लवर्स के लिए एक अच्छी खबर है। उन्हें राजस्थानी सिनेमा को करीब से जानने और देखने का मौका मिलेगा, वो भी पूरे 3 दिन। रील के स्टार्स से रीयल लाइफ में मिल पाएंगे। उन्हें देख पाएंगे। छू पाएंगे, महसूस कर पाएंगे।

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यह सब संभव होगा जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में तीन दिन (25, 26 और 27 मार्च) चलने वाले राजस्थानी सिनेमा महोत्सव में। राज्य सरकार के सहयोग से राजस्थानी सिनेमा विकास संघ की ओर से किए जा रहे इस महोत्सव में राजस्थान, यहां की कला एवं संस्कृति और सिनेमा का संगम देखने को मिलेगा।

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राजस्थानी सिनेमा विकास संघ के संरक्षक विपिन तिवारी और अध्यक्ष शिवराज गूजर ने बताया कि महोत्सव में राजस्थानी सिनेमा से जुड़े हर शख्स को खुला निमंत्रण है, क्योंकि यह उनका कार्यक्रम है और उन्हीं के लिए। महोत्सव को मेले का रूप दिया गया है ताकि यहां आने वाला कोई शख्स बोरियत महसूस नहीं करे।

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प्रदेश के सभी संभागों की झांकियां सजाई जाएंगी, जिसमें वहां के स्थानीय कलाकार भाग लेंगे। सिनेमा प्रेमियों को तीनों दिन राजस्थानी फिल्में देखने को मिलेगी। बच्चों के लिए डॉलर-चकरी, झूले होंगे। खाने के शौकीनों के लिए फूड कोर्ट होगा तो खरीदारी करने वालों के लिए विभिन्न सरकारी एवं गैरसरकारी संस्थानों के उत्पादों की स्टाल्स होगी।

लाइव शूटिंग रहेगी आकर्षण

महोत्सव में लाइव शूटिंग भी दिखाई जाएगी। इसके पीछे मकसद यही है है कि सिनेमा को देखकर दांतों तले उंगली दबाने वाले दर्शक जान पाएं कि फिल्म की शूटिंग कैसे होती है। क्या-क्या उपकरण काम आते हैं। किस तरह एक ही सीन के लिए बार-बार रीटेक होते हैं और किस तरह टुकड़ों-टुकड़ों में सीन शूट किया जाता है। इस दौरान लाइव शूटिंग कर रहे निर्देशक, कलाकार और तकनीशियन दर्शकों की पूछी गई जानकारी देकर उनकी उत्सुकता को भी शांत करेंगे।

वरिष्ठ दिवंगत फिल्मकारों की स्मृति में दिए जाएंगे सम्मान

राजस्थानी सिनेमा से जुड़े ऐसे वरिष्ठ दिवंगत फिल्मकारों, कलाकारों और तकनीशियनों की स्मृति में सम्मान दिए जाएंगे, जिनका राजस्थानी सिनेमा को शुरू करने में, ऊंचा उठाने में योगदान रहा है। यह सम्मान इसलिए दिए जा रहे हैं कि लोगों के दिलों में उनका काम और उनकी यादें जिंदा रहें। साथ ही उनके किए काम से नये लोग प्रेरणा ले सकें।

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